Biography of Major Dhyan Chand

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ISBN: 978-93-5477-931-2
AUTHOR NAME: RPH Editorial Board
EDITION: 2024
BOOK CODE: A-131
MEDIUM: Hindi
FORMAT: Paper Back
PAGES: 56
SIZE: 5.5 × 8.5 inch
PUBLISHING DATE: May 2024

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यह पुस्तक हॅाकी के मैदान से परे ध्यानचंद के जीवन की चुनौतियों और विजयों का अन्वेषण करती है। अपनी कला के प्रति उनका समर्पण, सफलता के सामने उनकी विनम्रता और भारतीय सेना में एक सैनिक के रूप में उनकी भूमिका उनके चरित्र की गहराई और अपने देश और जिस खेल से वह प्यार करते थे, उसकी सेवा करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
खेल की दुनिया में, कुछ व्यक्ति अपने युग से आगे निकल कर दिग्गज बन जाते हैं, जिनके नाम समय के गलियारों में गूंजते हैं। भारतीय हॅाकी के चमकते सितारे मेजर ध्यानचंद ऐसे ही एक महान खिलाड़ी हैं जिनकी मैदान पर असाधारण प्रतिभा ने उन्हें खेल के महान खिलाड़ियों की कतार में जगह दिलाई। हाॅकी के साथ उनका सफर झाँसी के अस्थायी मैदान से शुरू हुआ।
ध्यानचंद का भारतीय हॅाकी टीम के साथ जुड़ाव खेल और देश के लिए एक स्वर्णिम युग लेकर आया। खेल पर उनकी महारत ऐसी थी कि गेंद पर उनके जादुई नियंत्रण के लिए उन्हें ‘द विजार्ड’ उपनाम मिला। 1928ए 1932 और 1936 के ओलंपिक खेलों में उनका प्रदर्शन इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है, उनके गोल स्को¯रग कौशल ने दर्शकों और विरोधियों को समान रूप से आश्चर्यचकित कर दिया था।

परिचय; प्रारंभिक जीवन; अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण; 1928: एम्स्टर्डम; 1932: लॉस एंजिल्स; 1936: बर्लिन; ध्यानचंद की हिटलर से मुलाकात; 1936 के बाद; पूर्वी अफ्रीका की यात्रा; सेवानिवृत्ति; कोच के रूप में ध्यानचंद; ध्यानचंद के अंतिम दिन; विरासत और सम्मान; ध्यानचंद: जीवनवृत्त; जीवन एवं कार्य-एक नजर में

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