| ISBN: | 978-93-5012-270-9 |
| AUTHOR NAME: | RPH Editorial Board |
| EDITION: | 2025 |
| BOOK CODE: | A-89 |
| MEDIUM: | Hindi |
| FORMAT: | Paper Back |
| PAGES: | 56 |
| SIZE: | 5.5 × 8.5 inch |
| PUBLISHING DATE: | May 2025 |
Rs. 40/-
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार और दार्शनिक थे। वह एकमात्र ऐसे भारतीय साहित्यकार हैं जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला है। साथ ही, वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले प्रथम एशियाई और साहित्य में नोबेल पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय भी थे। वह दुनिया के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान हैं भारत का राष्ट्र-गान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान ‘आमार सोनार बाँग्ला’। गुरुदेव के नाम से भी प्रसिद्ध रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बांग्ला साहित्य और संगीत को एक नई दिशा दी। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारतीय सभ्यता की अच्छाइयों को पश्चिम में और वहाँ की अच्छाइयों को यहाँ पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब वे मात्र 8 वर्ष के थे तब उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी थी। 16 वर्ष की आयु में उनकी कवितायें प्रकाशित भी हो गयीं थीं। वह परम राष्ट्रवादी थे और ब्रिटिश राज की भत्र्सना करते हुए उन्होंने देश की आजादी की मांग की थी। जलियाँवाला बाग कांड के बाद उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दिए गए ‘नाइटहुड’ का त्याग कर दिया था। अंदर के पृष्ठों में इस विषय पर रुचिपूर्ण विवरण है कि कैसे औपचारिक शिक्षा से दूर भागने वाला एक विद्यार्थी कालांतर में एक महान कवि, साहित्यकार एवं दार्शनिक बनकर विश्वपटल पर उभरा और अपनी कृ तियों द्वारा अमिट छाप छोड़ गया।
परिचय; पारिवारिक इतिहास; बचपन एवं शिक्षा; प्रारंभिक जीवन; इंग्लैंड प्रवास; विवाह; शांति निकेतन; विदेशों में प्रसिद्धि; ‘नाइटहुड’ का त्याग; अंतिम समय; बहुमुखी प्रतिभा; साहित्यिक विरासत; विविध प्रयोग; अनमोल वचन; जीवन एवं कार्य - एक नजर में