| ISBN: | 978-93-88642-04-0 |
| AUTHOR NAME: | Ramnath Gupta |
| EDITION: | 2020 |
| BOOK CODE: | M-10 |
| MEDIUM: | Hindi |
| FORMAT: | Paper Back |
| PAGES: | 56 |
| SIZE: | 5.5 × 8.5 inch |
| PUBLISHING DATE: | May 2018 |
Rs. 35/-
‘अनुगीता’ महाभारत के ‘अश्वमेधिक पर्व’ में आती है । यह भी श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश है, किन्तु इसकी शैली बिल्कुल ही भिन्न है । इस गीता में उपदेश रूपकों के माध्यम से दिए गए हैं तथा तीन रूपकों में सारा ज्ञान संजो दिया गया है । इस गीता की मुख्य विशेषता अदृश्य कर्मों और ब्रह्म–रूपी अदृश्य जगत का वर्णन है, जो बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक है । जिन पाठकों ने महाभारत के ‘भीष्मपर्व’ में दी गई मूल गीता को पढ़ा है, उन्हें ‘अनुगीता’ बहुत ही रुचिकर लगेगी । इस गीता पर हिन्दी में पुस्तकों का अभाव है । आशा है, पाठक इस पुस्तक का स्वागत करेंगे ।
आमुख, सिद्ध–महर्षि–कश्यप संवाद (पृष्ठभूमि, सिद्ध–महर्षि–कश्यप संवाद, टिप्पणी) । एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी के मध्य संवाद (प्राण–अपान–संवाद, अन्तर्यामी की प्रधानता और ब्रह्म–रूपी वन, टिप्पणी, मन की निर्लिप्तताय परशुराम द्वारा क्षत्रिय–संहार छोड़ कर तपस्या के लिए जाना, राजा अम्बरीष की गाई हुई गाथा एवं ब्राह्मण–जनक संवाद, टिप्पणी, ब्राह्मण का अपने ज्ञाननिष्ठ स्वरूप का परिचय देना, टिप्पणी) । गुरु–शिष्य संवाद, ब्रह्माजी का ऋषियों को उपदेश (प्रकृति के तीन–गुणों का वर्णन, अहंकार से पंचमहाभूतों और इंद्रियों की सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवत, निवृत्तिमार्ग, चराचर प्राणियों के अधिपति, धर्म आदि के लक्षण, विषयों की अनुभूति के साधन, क्षेत्रज्ञ की विलक्षणता, आदि–अंत का वर्णन, देह–रूपी कालचक्र, एक गृहस्थ के धर्म, एक ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासी के धर्म, परमात्मा की प्राप्ति के उपाय, बुद्धिमान पुरुष की प्रशंसा, पंचभूतों के गुण, तपस्या का महत्व, क्षेत्रज्ञ (आत्मा) का स्वरूप और उसके ज्ञान की महिमा, उपसंहार ।